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रविवार, 5 अक्टूबर 2014

आज जरा जी लेने दे मुझे...


आ भर लूँ बांहों में तुझे
कि आज जी लेने दे मुझे।

ये तरसती निगाहें
और खुली मेरी बाहें
तू इन धड़कनों की प्यास है
क्या कहती हैं धड़कने तेरी
आज सुनने दे मुझे।

मेरी प्यास है तू
एक अन्जाना एहसास है तू
लिखा है नाम मेरा
हाथों की लकीरों में तेरी
एक बार फिर पढ़ने दे मुझे।

ये लबों की सुर्खी मेरी
बस तेरे नाम से है माही!
है इश्क़ तुझसे
कि आज लबों को लबों से
छू लेने दे मुझे।

आज जरा जी लेने दे मुझे...।

-महेश बारमाटे "माही"

बुधवार, 13 अगस्त 2014

तुम थे वहाँ...

तुम थे वहाँ
करते मेरा इंतज़ार
बैठ बिस्तर के कोने में
था मेरे आने का एतबार।

जाने कितनी देर
बैठे थे तुम वहाँ
मैंने की देर
गर्म मौसम में जैसे सर्द हवा।

हाँ! गलती थी मेरी
कि मैं न आया
किया इंतज़ार तुमने
और मैं पछताया।

पर क्या करता मैं
तुम जो हो खफा मुझसे
करनी नहीं है बात तुम्हे
और चाहते हो वफ़ा मुझसे।

तेरे होने का एहसास मुझे
तेरे और करीब ले आता है
तेरी मौजूदगी बताती है
कि ये एहसास तुझे
कितना तड़पाता है।

न तड़प
आ बाँहों में भर मुझे
एक पल को हो के मेरा
एक नगीना सा
दिल के ताज पे जड़ मुझे।

आ मेरा हो जा
मुझमे आज तू खो जा
ख्वाबों में सोया है अक्सर
आ खो के मुझमे तू सो जा।

कर ख़त्म इंतजार को अब
बरसा मुझपे अपने प्यार को अब
बिता दे सारी ज़िन्दगानी अपनी माही!
इस पल में पूरा कर अपने एतबार को अब।

महेश बारमाटे "माही"

गुरुवार, 26 जून 2014

कहानी तेरे नाम की...

लिखी थी कहानी तेरे नाम की
मुझमे थी ज़िंदगानी तेरे नाम की

हवा में ठंडक, फिजा में रंगत
और चुनरी थी धानी तेरे नाम की

गुलों में गुलाब, मयखाने में शराब
साकी भी थी दीवानी तेरे नाम की

पुकारता चला था मैं, हर गली, हर शहर
लबों पे थी कहानी तेरे नाम की

एक कहानी, तू पगली दीवानी
मेरी भी एक थी रानी तेरे नाम की

सूखी स्याही, पन्नों पे फैला अश्कों का पानी
खो गई मुझसे, ये ज़िंदगानी तेरे नाम की

अब जो जी रहा हूँ
तेरे इंतज़ार में माही!
आ पूरी करें
फिर ये कहानी तेरे नाम की

लिखी थी जो
कहानी तेरे नाम की
तुझ बिन अधूरी है
मेरी ज़िंदगानी तेरे नाम की...

- महेश बारमाटे “माही”

(Photo Courtesy : images.google.com)

सोमवार, 5 मई 2014

मैं...

तेरे इश्क़ की
आवाजें सुनता मैं। 
अब हर पल
तेरी धड़कनों से
बातें करता मैं ।

कभी इस जहां, कभी उस जहां
कभी दरिया तो कभी सहरा
बस तुझे ही ढूँढता फिरता मैं।

जी रहा हूँ इस कदर
दर-ब-दर, दर-ब-दर
हर गली हर शहर
तेरे ही नगमें गाता मैं।

ज़िंदगी एक ख्वाब हो
या सफर...
जुदा हो के भी
बस तुझमे समाता मैं।

तेरी कहानी
का हर लफ्ज
मेरी आँखों से पढ़ ले
के हर किस्से में
खुद में ही खोता जाता मैं।

आज मुझमे और तुझमे
क्या फर्क है बचा माही!
कभी तू मुझमे
कभी तुझमे समाता मैं।


- महेश बारमाटे "माही"

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

मेरे माही!


इश्क़ करता है तू
मुझसे मेरे माही!
पर जाने डरता है तू
किस से मेरे माही!

ये चाहत भी अजीब होती है।
हर पल मैं – तेरे और तू – मेरे करीब होती है।
फिर भी जुदा – जुदा सा फिरता है तू
मुझसे मेरे माही!

इश्क़ है तो इज़हार कर
आ इक पल के लिए तो मुझसे प्यार कर।
के जी ले आज उस पल में ज़िंदगी सारी
बिन मेरे जी रहा है तू जिसे मेरे माही!

हम मिले थे
कभी न बिछड़ने के लिए मेरे माही!
तेरी – मेरी भावना के संग
बहने के लिए मेरे माही!
भावनाओं का बहता झरना
किस मोड़ पे ले आया है हमें
के अब ज़िन्दगी तरस रही है,
मरने के लिए मेरे माही!

आ एक बार फिर
एक हो जाते हैं।
इक दूजे की बाहों में
खो जाते हैं।
इस गुजरते लम्हे की कसम है तुझे
के अब के ऐसे मिलें
के फिर न बिछड़ने के लिए मेरे माही!

मेरे माही!
आज भी तू मेरी तलाश में है
दूर ही सही, तू फिर भी मेरे पास में है।
तो फिर क्यूँ जुदा मुझसे होने की ज़िद है तेरी,
कोई खता नहीं, फिर भी सजा देने की ज़िद है तेरी,
के आज मेरा नाम,
तेरे रग – रग के एहसास में है।

- महेश बारमाटे "माही"

बुधवार, 29 जनवरी 2014

इश्क़

तुम तो गाड़ी से आ रहे थे,
और हम पैदल ही जा रहे थे...

जानूँ न क्यों तुमने,
हमको था फिर यूँ ठोका
के अब तो हमे भी दिन में 
तारे नज़र आ रहे थे। 

सामने की गाड़ी ने भी 
ब्रेक से था खुद को रोका 
पर वो तो था दिमाग से पागल,
ब्रेक की जगह वो तो,
एक्सिलीरेटर दबा रहे थे...

हमारी तो गलती थी इतनी,
के हम तो रोड किनारे से जा रहे थे,
और पीछे की गाड़ी में साहब,
मेमसाब से इश्क़ फ़रमा रहे थे। 

अब तो टूटी थी हड्डी
और हम दर्द से कराह रहे थे
और देखने वाले भी हमको 
मंद - मंद मुस्कुरा रहे थे। 

सायरन सुना जब एंबुलेंस का
तो लगा कि अब तो बच ही गए,
पर क्या पता था के अब तो  
यमदूत भी सायरन वाले वाहन में आ रहे थे... 

मरते - मरते हम तो 
जाने क्या - क्या गुनगुना रहे थे
के "मर जाओ तुम कमीनों 
जो रात का मज़ा,
दिन - दहाड़े गाड़ी में लिए जा रहे थे... "


- इंजी॰ महेश बारमाटे "माही"