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रविवार, 20 जून 2021

मुझे बेवफा न समझ..


तेरी सोच का मैं गुमान हूँ
मुझे इश्क़ की बहार न समझ।
मैं मजबूरियों में जो चला गया
मुझे बेवफा न समझ।

किसी दिन वापस आऊँगा
मुझे कल की बात न समझ।
मुझे समय पर है यक़ीन
मुझे वस्ल-ए-रात न समझ।

मेरी गुमनामियाँ तुझसे ही हैं
जो तू न मिला तो मैं क्या रहा
लिख रहा हूँ आज भी एक खत
मुझे डाकिया न समझ।

क्या पता, है ये क्या लिखा
मैं अनपढ़, मैंने कुछ न सीखा।
मेरे हाथ बस चलते रहे
कलम को नागवार न समझ।

थोड़ी तवज्जोह में खुश हो लूँ मैं भी
अगर वो तेरी तरफ से हो..।
दिल का कोना-कोना धड़कता है अब भी तेरे ही लिए
मुझे कोई ग़ैर यार न समझ..।

- महेश "माही"

मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

वो झिलमिल तारों का साथ...

एक रात,
बैठा था मैं,
कुछ झिलमिल तारों के साथ...
ले हम हाथों मे हाथ,
रहे थे एक दूजे से सुख दुख की बात

हर किसी को ग़म था,
किसी न किसी की जुदाई का...
फिर भी हम खुश थे,
के ये वक़्त न था तनहाई का

हमने बात की,
एक दूजे के अन्तर्मन से
मुलाक़ात की...
हम नाचे,
हम गाए,
और सारे जहां ने खुशियों की बरसात की

झूम रही थी ये धरा,
और झूम रहा था आसमां...
वक़्त बीतता गया, कारवां बढ़ता गया,
किसी ने न जाना,
के हम पहुंचे थे कहाँ ?

और अचानक
जाने कहाँ से,
उस मनहूस सुबह की लालिमा छाई,
और एक - एक कर,
सारे तारों ने ले ली,
मुझसे विदाई...

छोड़ के मुझे,
उसी राह पे तन्हा,
आज ज़िंदगी की धूप में,
खो गए हैं वो कहाँ ?

जो झिलमिलाते थे,
मेरी ज़िंदगी के कुछ पलों को रौशन कर के
आज गुम हो गए हैं वो
जाने कहाँ गुमसुम हो के...

फिर भी दिल में आस है,
आस नहीं,
मुझे तो पूरा विश्वास है...

के ये दिन फिर ढलेगा,
और सुहानी रात आएगी
जैसे याद आ रही है मुझे उनकी,
एक रात फिर उन दोस्तों की बारात आएगी...

हम फिर झिलमिलाएंगे,
झूमेंगे, नाचेंगे, गाएँगे,
अपनी दोस्ती का जश्न मनाते हुए,
हर राहगीर को एक नई राह दिखाएंगे...

                     ज़िंदगी की धूप में,
                     हर तारा कुछ यूं खो जाता है...
                     के भूल के वो खुद का झिलमिलाना माही!
                     वो सुबह के सूरज की तरह,
                     किसी की ज़िंदगी हो जाता है...

- इंजी॰ महेश बारमाटे "माही "
28 अक्टूबर 2012 

रविवार, 18 मार्च 2012

दोस्ती और प्यार...


ऐ साजन मेरे !
जब तुम होते हो साथ मेरे...  
भूल जाता हूँ मैं सारा जहां,
हर शख्स, हर रिश्ता और हर दोस्त मेरा...
पर माफ कर देना तुम मुझे
के जब दोस्त हो कोई साथ मेरे
मैं तुझे कभी भूलता नहीं
पर उनका साथ आने देता नहीं
कभी तेरी याद
के दोस्ती और प्यार
होते हैं जैसे
इक़रार और एतबार...

रविवार, 10 अप्रैल 2011

दोस्त

नज़रें मिला के वो, दिल चुरा के ले गए,
दिल बहला के वो, हम को अपने दिल में बसा के ले गए...
पर वो जो गए, तो भी गम न किया हमने कभी,
के अब कि बार वो मेरा दिल, अपना बना के ले गए...

वो गए, दिल गया,
फिर भी उनकी यादों के सहारे जीते चले गए...
बिताये जो लम्हें, संग उनके हमने,
वो सरे पल भी वो, सपना बना के ले गए...

वो मेरी हर बात पे उनका मुस्काना,
मेरी शायरियों को अपने होंठों से लगाना...
कभी रूठना और कभी मनाना,
वो ज़िन्दगी के हर पन्ने को, इक याद बना के चले गए...

वो बीता हुआ कल,
उनके संग बीता मेरा हर एक पल...
आज भी लिख रहा हूँ मैं कागजों पर,
के वो दिल में मेरे अपनी धाक बना के चले गए...

वो उनकी दोस्ती में जी उठना
और दोस्तों की खातिर कुछ कर जाना...
कॉलेज का हर एक दिन,
वो मेरे लिए ख़ास बना के चले गए...

दोस्ती का हर एक पल,
इस तरह जीया था मैंने, अपना वो कल,
के रहेगी हमारी दोस्ती सदा अमर "माही",
वो दिल में मेरे ये विश्वास बना के चले गए...

महेश बारमाटे "माही"
8th April 2011

बुधवार, 6 अप्रैल 2011

Who is He ?


Please don't come again
In front of me...
Else
I'll forget again
Who's the inside me ?

I know you
You know me
But you never wanna know
Who is actually in me...?

I was always there,
When you had any fear
But no one was there
Whenever I wanted to show my tear...

I always drunk my tear
And didn't show you my fear
Because you were happy
And you were of my near

You were playing with me
And I Let u play
"You are always mine"
"For this nothing can you say"

But today,
I know you very well
And you still don't know me 
Someday, someone will ask you about me
And you'll definitely say - "Who is He?"

- Mahesh Barmate (Maahi)
  2nd apr 2011
  4.15am