गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

आज भी...

प्यार नहीं करता हूँ मैं अब तुझसे
पर मेरे हर पल पे मुझे तेरा इंतजार आज भी है.

करीब है मेरी मौत भी अब मेरे,
पर मुझे तेरे वादे पे एतबार आज भी है.

मुझे तेरी हर एक "न"
तेरे और भी करीब ले आती है,
के मुझे तेरी बस आखिरी "हाँ" का इंतजार आज भी है.

पता नहीं वो दिन कब आएगा,
जब तेरा दिल सिर्फ मुझको चाहेगा ?
तेरी चाहत भरी इक निगाह के लिए
ये दिल बेक़रार आज भी है.

खतागर हूँ, तभी तो तुझको,
क्या कुछ न बोल बैठा मैं,
पर तेरे रहम-ओ-करम का
"महेश" हक़दार आज भी है.

मुझसे प्यार करना शायद
तेरी किस्मत में कभी रहा ही नहीं,
पर 'माही',
तेरी किस्मत पे मुझे ऐतबार आज भी है.

- महेश बारमाटे
11 April 2008

6 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है अपने प्रेम को समर्पित कर दिया आपने सबकुछ......बहुत अच्छा लगा...सच में इंतजार तो आज भी है।

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  2. अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

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  3. SATYAM JI AAPKA POST BAHUT HI ACHCHA HAI... DHANYAWAAD
    MAIN BAHUT hi BYAST HOON AV MAIN HOSPITAL JA RAHA HOON ... MERI MAA KA TABIYAT SAHI NHI HAI SO, MAIN AAPSE BAAD ME BATEIN KARUNGA... BYE BYE.. I PROMIS U I WILL FOLLOW U .. SPECIFY UR MB. NO.. OR CALL ME..

    UTSAHWARDHAN KE LIYE DHANYAWAAD...

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  4. बहुत पसन्द आया
    हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद
    बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

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  5. धार्मिक मुद्दों पर परिचर्चा करने से आप घबराते क्यों है, आप अच्छी तरह जानते हैं बिना बात किये विवाद ख़त्म नहीं होते. धार्मिक चर्चाओ का पहला मंच ,
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